लैटिन शब्द "abstrahere" (अलग करना) से बना अमूर्तन मानव की मानसिक गतिविधि का एक महत्वपूर्ण पहलू है। इस प्रक्रिया में अधिक गहराई से विश्लेषण करने के लिए वस्तुओं के विभिन्न पहलुओं, विशेषताओं, तत्वों या अवस्थाओं को अलग करके स्वतंत्र इकाइयों के रूप में देखा और रूपांतरित किया जाता है। अमूर्तन की क्षमता व्यक्ति को खास पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करती है, जो समस्याएं हल करने में महत्वपूर्ण है और ध्यान की प्रक्रिया से जुड़ी है।

अमूर्तन सामान्यीकरण करने और अवधारणाएं बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अमूर्तन के दो मुख्य प्रकार हैं: औपचारिक और विषयवस्तुगत।

औपचारिक अमूर्तन में वस्तुओं के उन गुणों या पहलुओं को अलग किया जाता है जो स्वयं वस्तुओं से स्वतंत्र रूप से मौजूद नहीं होते और केवल मानसिक स्तर पर ही मौजूद रह सकते हैं। इसका एक उदाहरण किसी वस्तु की ज्यामितीय आकृति को अलग करके देखना है, जो उस वस्तु से बाहर मौजूद नहीं होती। औपचारिक अमूर्तन कई वस्तुओं की समान विशेषताओं की पहचान करने और बाद में उनकी तुलना तथा वर्गीकरण करने में मदद करता है।

विषयवस्तुगत अमूर्तन वस्तुओं के उन पहलुओं को अलग करता है जिनमें कुछ हद तक स्वतंत्रता होती है और जिन्हें अलग इकाइयों के रूप में देखा जा सकता है। इस प्रकार का अमूर्तन वस्तुओं की अलग-अलग विशेषताओं को स्वतंत्र इकाइयों के रूप में पहचानने की प्रक्रिया को दर्शाता है।

अमूर्तन व्यक्ति को जटिल वस्तुओं और प्रक्रियाओं के विश्लेषण तथा समझ को सरल बनाने में मदद करता है। साथ ही, यह आसपास की दुनिया को अधिक गहराई से समझने के लिए अवधारणाएं और मॉडल बनाने में सहायक होता है।