वास्तवीकरण (अंग्रेजी: Actualization) एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति अपनी आंतरिक क्षमता को साकार करने, लक्ष्य हासिल करने और अपनी इच्छाओं व आकांक्षाओं को पूरा करने की कोशिश करता है। यह शब्द अक्सर अमेरिकी मनोवैज्ञानिक अब्राहम मैस्लो द्वारा प्रस्तावित आत्म-वास्तवीकरण की अवधारणा से जुड़ा है, जो उनकी आवश्यकताओं के पदानुक्रम का हिस्सा है।

मैस्लो के अनुसार, आत्म-वास्तवीकरण मानव आवश्यकताओं के पदानुक्रम में सबसे ऊपर है और अपनी क्षमताओं व प्रतिभाओं को पूरी तरह विकसित करने की आकांक्षा को दर्शाता है। इस प्रक्रिया में व्यक्ति अधिक समन्वित और संपूर्ण बनता जाता है तथा अपने सर्वोत्तम गुणों और क्षमताओं को प्रदर्शित व विकसित करता है।

वास्तवीकरण में रचनात्मक क्षमताओं का विकास, जीवन के लक्ष्यों की खोज और उन्हें साकार करना, व्यक्तिगत विकास तथा आत्म-ज्ञान की आकांक्षा शामिल हो सकती है। यह प्रक्रिया जीवन की गुणवत्ता में सुधार और संतुष्टि व खुशी पाने से भी जुड़ी है।