मनोविज्ञान के संदर्भ में द्वैधभाव किसी एक वस्तु, व्यक्ति या स्थिति के प्रति एक ही समय में परस्पर विरोधी भावनाओं या अनुभूतियों की मौजूदगी को दर्शाता है। यह अवधारणा मानवीय अनुभूति में आंतरिक टकराव और अस्पष्टता पर जोर देती है तथा भावनात्मक संसार की जटिलता और मानवीय प्रतिक्रियाओं की विविधता को दिखाती है।