अरस्तू
अरस्तू प्राचीन यूनान में 384 से 322 ईसा पूर्व तक जीवित रहे एक महान दार्शनिक और वैज्ञानिक थे। ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान ने दर्शन, विज्ञान और शिक्षा के विकास पर बहुत गहरा प्रभाव डाला।
नैतिकता के क्षेत्र में अरस्तू ने सद्गुणों की अवधारणा और मध्य मार्ग के विचार जैसे नए सिद्धांत प्रस्तुत किए, जो आज भी नैतिकता के शोधकर्ताओं को प्रेरित करते हैं।
राजनीतिक दर्शन में उनके कार्यों ने शासन के विभिन्न रूपों, कानूनों की भूमिका और न्याय से जुड़ी अवधारणाओं के निर्माण की नींव रखी।
तत्त्वमीमांसा और अस्तित्व-मीमांसा में अरस्तू ने सार और वास्तविकता से जुड़े सिद्धांत विकसित किए, जिन्होंने दर्शन और विज्ञान पर गहरी छाप छोड़ी।
शुरुआती जीवविज्ञानियों में से एक के रूप में उन्होंने जीव-जंतुओं और पौधों का वर्गीकरण और अध्ययन किया तथा जीवविज्ञान के विकास में योगदान दिया।
तर्कशास्त्र और वैज्ञानिक शोध की कार्यप्रणाली पर उनके कार्यों को विज्ञान और तार्किक चिंतन के विकास की बुनियाद माना जाता है।
एथेंस में लाइसीयम स्कूल की स्थापना करके अरस्तू ने शिक्षा और प्रशिक्षण का एक केंद्र बनाया, जिसका प्रभाव अनेक विद्यार्थियों तक पहुंचा। इनमें महान विजेता सिकंदर महान भी शामिल थे।