ऑटोकाइनेटिक प्रत्यक्षण
ऑटोकाइनेटिक प्रत्यक्षण (अंग्रेजी: Autokinetic perception) एक मनोवैज्ञानिक घटना है, जिसमें किसी अंधेरे वातावरण में बिना किसी दृश्य संदर्भ के दिखाई देने वाली स्थिर प्रकाशमान वस्तु चलती हुई लगती है। प्रत्यक्षण का यह भ्रम दिखाता है कि मस्तिष्क अस्पष्ट दृश्य जानकारी की व्याख्या करने की कोशिश कैसे करता है।
इस घटना का वर्णन पहली बार 20वीं सदी की शुरुआत में किया गया था और इसका उपयोग प्रत्यक्षण तथा ध्यान की स्थिरता का अध्ययन करने के लिए किया गया। ऑटोकाइनेटिक प्रत्यक्षण दिखाता है कि मस्तिष्क अनिश्चितता की स्थिति में अधूरी जानकारी को पूरा करके अर्थ बनाने का प्रयास कैसे करता है।
ऑटोकाइनेटिक प्रत्यक्षण के प्रयोगों में अक्सर अंधेरी पृष्ठभूमि पर एक छोटी चमकती हुई वस्तु का उपयोग किया जाता है। प्रेक्षकों के अनुसार वस्तु चलती हुई लगती है, हालांकि वास्तव में वह स्थिर रहती है। इस घटना का कारण यह है कि संदर्भ बिंदुओं या बाहरी रेखाओं जैसे अन्य दृश्य संकेतों के अभाव में मस्तिष्क वस्तु की स्थानिक स्थिति की ठीक से व्याख्या नहीं कर पाता।