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स्वगत वाणी (या निजी वाणी)

स्वगत वाणी (या निजी वाणी) (अंग्रेजी: Autonomous or private speech) एक मनोवैज्ञानिक शब्द है, जिसका अर्थ है स्वयं से की जाने वाली बातचीत। ऐसा आम तौर पर उन स्थितियों में होता है जिनमें किसी समस्या को हल करने या ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता होती है। इस प्रकार की वाणी बच्चों में अक्सर देखने को मिलती है, लेकिन वयस्कों में भी दिखाई दे सकती है।

बच्चों में खेलते समय या नई चुनौतियों का सामना करते समय स्वगत वाणी अक्सर देखी जाती है। यह सोच को व्यवस्थित करने, कार्यों की योजना बनाने और समस्याएं हल करने में मदद करती है। सामाजिक वाणी में संवाद दूसरे लोगों की ओर निर्देशित होता है, जबकि स्वगत वाणी आत्म-नियमन और स्वयं को व्यवस्थित करने का साधन होती है।

वयस्कों में भी स्वगत वाणी दिखाई दे सकती है, खासकर उन स्थितियों में जिनमें बहुत अधिक ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता हो या जब व्यक्ति किसी जटिल समस्या का सामना कर रहा हो। यह विचारों को व्यवस्थित करने, योजनाएं और रणनीतियां बनाने तथा स्वयं को प्रेरित करने में मदद करती है।

स्वगत वाणी बोलकर व्यक्त की गई या मन में होने वाली, दोनों प्रकार की हो सकती है। कुछ मामलों में व्यक्ति जोर से बोल सकता है, जबकि अन्य मामलों में मन ही मन संवाद कर सकता है। यह संज्ञानात्मक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण भाग है और जानकारी को बेहतर ढंग से समझने तथा उसका अर्थ ग्रहण करने में सहायता करती है।