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मिखाइल मिखाइलोविच बाख्तिन

मिखाइल मिखाइलोविच बाख्तिन (1895-1975) एक प्रमुख रूसी दार्शनिक, संस्कृति-विशेषज्ञ, भाषाविद्, साहित्य-विशेषज्ञ और मनोवैज्ञानिक थे।

एम. बाख्तिन द्वारा विकसित प्रमुख अवधारणाओं में से एक साहित्य और संस्कृति में बहुस्वरता का विचार है। बहुस्वरता का अर्थ किसी साहित्यिक रचना या सामाजिक विमर्श में अनेक आवाजों, मतों और दृष्टिकोणों की मौजूदगी है। एम. बाख्तिन का मानना था कि साहित्यिक रचनाओं और सार्वजनिक अभिव्यक्ति में हमेशा अलग-अलग आवाजें मौजूद रहती हैं, जो एक-दूसरे का विरोध कर सकती हैं।

बाख्तिन के लेखन में एक महत्वपूर्ण अवधारणा “क्रोनोटोप” थी, जो साहित्य और संस्कृति में समय और स्थान के पारस्परिक संबंध का वर्णन करती है। उनका मानना था कि हर साहित्यिक संसार का अपना क्रोनोटोप होता है, जो कथा और उसे समझने की विशेषताओं को निर्धारित करता है।

मनोविज्ञान के क्षेत्र में एम. बाख्तिन के शोध इस विचार पर आधारित थे कि हर व्यक्ति सांस्कृतिक और सामाजिक कारकों के नजरिए से दुनिया को देखता और समझता है। उन्होंने व्यक्ति और सांस्कृतिक संदर्भ के बीच पारस्परिक संबंध के साथ-साथ अर्थ के निर्माण में भाषा की भूमिका पर जोर दिया।