मूल भावनाएं
मूल भावनाएं, जिन्हें बुनियादी भावनाएं या जन्मजात भावनाएं भी कहा जाता है, प्रमुख भावनाओं का एक छोटा समूह हैं जिन्हें सभी मनुष्यों में सार्वभौमिक और जन्मजात माना जाता है। आम तौर पर निम्नलिखित को मूल भावनाओं में शामिल किया जाता है:
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खुशी: यह भावना सकारात्मक और सुखद घटनाओं तथा अनुभवों से जुड़ी होती है। खुशी मुस्कान, हंसी, संतुष्टि और प्रसन्नता की अनुभूति के रूप में प्रकट हो सकती है।
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शोक (उदासी): शोक किसी नुकसान या नकारात्मक घटनाओं से जुड़ा होता है। यह भावना उदासी, दुख और विषाद के रूप में प्रकट हो सकती है।
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डर: डर किसी खतरे या खतरनाक स्थिति के जवाब में पैदा होता है। यह भावना चिंता, बेचैनी और घबराहट से जुड़ी हो सकती है।
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गुस्सा: गुस्सा नाराजगी और आक्रामकता के अनुभव से जुड़ा होता है। यह भावना चिड़चिड़ाहट, उग्र क्रोध और रोष के रूप में प्रकट हो सकती है।
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आश्चर्य: यह भावना अप्रत्याशित या असामान्य घटनाओं के जवाब में पैदा होती है। आश्चर्य हैरानी, दिलचस्पी और विस्मय के रूप में प्रकट हो सकता है।
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घृणा: घृणा किसी अप्रिय या घिनौनी चीज के प्रति नाराजगी और उसे अस्वीकार करने से जुड़ी होती है। यह भावना घिन और अस्वीकार के रूप में प्रकट हो सकती है।
मूल भावनाओं को सार्वभौमिक माना जाता है, क्योंकि वे अलग-अलग संस्कृतियों और सांस्कृतिक पृष्ठभूमियों के लोगों में पाई जाती हैं। इन्हें जन्मजात भी माना जाता है, क्योंकि शिशुओं और उन बच्चों में भी इन भावनाओं की अभिव्यक्ति देखी जा सकती है जिन्होंने अभी सामाजिक-सांस्कृतिक मानदंड नहीं सीखे हैं।