रंग बोध (color perception) किसी जीव की अपने आसपास की दुनिया के रंगों को महसूस करने और उनकी व्याख्या करने की क्षमता है। यह एक जटिल प्रक्रिया है, जो कई कारकों पर निर्भर करती है। इनमें प्रकाश के भौतिक गुण, आंख की संरचना और कार्यप्रणाली, तथा मस्तिष्क में जानकारी का प्रसंस्करण शामिल हैं।

रंग बोध केवल आंख में प्रवेश करने वाले प्रकाश की स्पेक्ट्रल संरचना और तीव्रता तक सीमित नहीं है। यह संदर्भ और आसपास के परिवेश पर भी निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, प्रकाश व्यवस्था, पृष्ठभूमि और अन्य कारकों के अनुसार एक ही वस्तु का रंग अलग-अलग दिखाई दे सकता है।

रंग बोध हमारी व्यक्तिगत विशेषताओं पर भी निर्भर कर सकता है, जैसे रंगों को देखने का अनुभव और मनोवैज्ञानिक विशेषताएं।

इस प्रक्रिया का अध्ययन दृष्टि शरीरक्रिया विज्ञान, प्रत्यक्षण मनोविज्ञान और रंग विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है। डिजाइन, कला और ऐसे कई अन्य क्षेत्रों में इसका विशेष महत्त्व है, जहां रंग की अहम भूमिका होती है।