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अंतरात्मा
अंतरात्मा व्यक्ति के मन में मौजूद एक आंतरिक संज्ञानात्मक और भावनात्मक तंत्र है, जो उसके कार्यों और निर्णयों के नैतिक पहलुओं का विश्लेषण और मूल्यांकन करता है। यह एक आंतरिक “न्यायाधीश” या “पर्यवेक्षक” की तरह काम करता है और सीखे गए मूल्यों तथा सामाजिक-सांस्कृतिक मानदंडों के आधार पर व्यक्ति को नैतिक रूप से सही और गलत कार्यों में अंतर करने में मदद करता है। नैतिक मानदंडों के अनुरूप चलने पर यह आंतरिक तंत्र संतुष्टि की भावना पैदा कर सकता है, जबकि इन मानदंडों का उल्लंघन करने पर बेचैनी या पश्चाताप हो सकता है। अंतरात्मा का विकास परवरिश, शिक्षा और आसपास के परिवेश से संवाद की प्रक्रिया में होता है, और यह नैतिक व्यवहार तथा निर्णय लेने को नियंत्रित करते हुए मानव मनोविज्ञान का एक महत्वपूर्ण घटक बनी रहती है।