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अहंकेंद्रिता
अहंकेंद्रिता एक मनोवैज्ञानिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति दुनिया को केवल अपने “मैं” के नजरिए से देखता और उसकी व्याख्या करता है। इसमें व्यक्ति दूसरे लोगों के दृष्टिकोण पर विचार नहीं कर पाता या उसकी कल्पना तक नहीं कर पाता, और यह भी नहीं समझ पाता कि दूसरों की राय और अनुभव उसके अपने विचारों और अनुभवों से अलग हो सकते हैं।
अहंकेंद्रिता और स्वार्थ में अंतर करना चाहिए। स्वार्थ का संबंध दूसरों के हितों को नुकसान पहुंचाकर भी अपने हित में काम करने की प्रवृत्ति से है। इसके विपरीत, अहंकेंद्रिता में दूसरों के हितों और दृष्टिकोण पर विचार करने तथा उन्हें समझने की क्षमता सीमित होती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि व्यक्ति हमेशा केवल अपने हित में ही काम करना चाहता है।