शब्दावली में जाएं

प्रयोग की वैधता

प्रयोग की वैधता (validity of an experiment) वह माप है जो यह आकलन करता है कि प्रयोग कितनी अच्छी तरह और सही ढंग से किया गया है, तथा उसके परिणामों के आधार पर निकाले गए निष्कर्ष कितने उचित हैं।

प्रयोगात्मक मनोविज्ञान में प्रयोग की वैधता के कई प्रकार माने जाते हैं:

  1. आंतरिक वैधता (internal validity): वैधता का यह रूप आकलन करता है कि प्रयोग के परिणामों को वास्तव में स्वतंत्र चर के प्रभाव से किस हद तक जोड़ा जा सकता है, न कि किसी अन्य कारक से। आंतरिक वैधता का अर्थ है कि प्रयोग में बाहरी चरों के प्रभाव को नियंत्रित किया जाता है और अध्ययन किए जा रहे प्रभाव को अलग रखा जाता है।

  2. बाहरी वैधता (external validity): वैधता का यह प्रकार आकलन करता है कि प्रयोग के परिणामों को व्यापक आबादी या अन्य संदर्भों पर किस हद तक लागू किया जा सकता है। बाहरी वैधता यह निर्धारित करती है कि प्रयोग के परिणाम वास्तविक परिस्थितियों या दशाओं को किस हद तक दर्शाते हैं।

  3. ऑपरेशनल वैधता (operational validity): यह पहलू आकलन करता है कि प्रयोग में इस्तेमाल किए गए चरों को कितनी प्रभावी ढंग से परिभाषित और मापा गया है। ऑपरेशनल वैधता का संबंध मापन विधियों के सही चयन और अवधारणाओं के ऑपरेशनल रूप से निर्धारण से है।

  4. कंस्ट्रक्ट वैधता (construct validity): वैधता का यह प्रकार आकलन करता है कि प्रयोग के चर और प्रक्रियाएं उस विशिष्ट मनोवैज्ञानिक कंस्ट्रक्ट या अवधारणा को कितनी सटीकता और उपयुक्तता से दर्शाती और मापती हैं, जिसका शोधकर्ता अध्ययन करना चाहता है।

प्रयोग की वैधता का स्तर इस बात पर निर्भर करता है कि शोधकर्ता प्रयोग की रूपरेखा कितनी सावधानी से बनाता और उसे संचालित करता है, तथा संभावित पक्षपातों और बाहरी कारकों को कितनी अच्छी तरह नियंत्रित किया जाता है।