वैयक्तिकता गुणों, विशेषताओं और लक्षणों का वह अनूठा मेल है जो हर व्यक्ति को विशिष्ट बनाता है और उसके दुनिया को देखने के नजरिए, सोचने के ढंग, व्यवहार की शैली और पारस्परिक संबंधों में दिखाई देता है। यह एक बहुआयामी अवधारणा है, जो व्यक्तित्व की विशेषताओं, मान्यताओं, मूल्य-झुकावों, प्रेरणाओं और बाहरी दुनिया से संवाद के तरीकों के मेल पर आधारित है।

वैयक्तिकता का निर्माण आनुवंशिकता, परिवेश, पालन-पोषण, शिक्षा और अपने जीवन के अनुभवों के प्रभाव में होता है। यह अवधारणा हर व्यक्ति की विशिष्टता और मौलिकता तथा आत्म-साक्षात्कार, आत्मज्ञान और आत्म-अभिव्यक्ति की उसकी क्षमताओं पर जोर देती है। वैयक्तिकता स्वयं को समझने और अपने व्यक्तित्व का आकलन करने का आधार है तथा समाज और आसपास की वास्तविकता के साथ व्यक्ति के संबंधों की गतिशीलता को निर्धारित करती है।