शब्दावली में जाएं

मैकियावेलीवाद

मैकियावेलीवाद एक व्यक्तित्व सिंड्रोम है, जिसकी विशेषताएं ये हैं:

  1. मान्यताएं (दृष्टिकोण): मैकियावेलियन मान्यताओं वाले लोग विश्वास करते हैं कि दूसरों के साथ व्यवहार करते समय जोड़-तोड़ और छल की रणनीतियों का इस्तेमाल किया जा सकता है, बल्कि ऐसा करना जरूरी भी है। वे मानते हैं कि जोड़-तोड़ और दूसरों को प्रभावित करने की रणनीतियां अपने लक्ष्य हासिल करने के प्रभावी तरीके हो सकती हैं।

  2. जोड़-तोड़ के कौशल: मैकियावेलियन लोगों में जोड़-तोड़ के विशिष्ट कौशल होते हैं। इनमें दूसरों को राजी करने, उनके इरादों और लक्ष्यों को समझने तथा इस जानकारी का इस्तेमाल अपने हित साधने के लिए करने की क्षमता शामिल है।

मैकियावेलीवाद का नाम इतालवी दार्शनिक और राजनीतिक सिद्धांतकार निकोलो मैकियावेली के नाम पर पड़ा, जिन्होंने “द प्रिंस” नामक ग्रंथ लिखा था। उनके इस ग्रंथ को राजनीतिक जोड़-तोड़ और सत्ता से जुड़े विषयों पर लिखी गई बुनियादी कृतियों में से एक माना जाता है। आधुनिक मनोविज्ञान और समाजशास्त्र में “मैकियावेलीवाद” शब्द का इस्तेमाल व्यक्तित्व की कुछ खास विशेषताओं और दूसरों के साथ व्यवहार की शैली का वर्णन करने के लिए किया जाता है।

मैकियावेलीवाद का स्तर अधिक होने पर व्यक्ति में रणनीतिक सोच की प्रवृत्ति अधिक हो सकती है, लेकिन स्वार्थी व्यवहार और दूसरों की भावनाओं व जरूरतों के प्रति सहानुभूति की कमी भी दिखाई दे सकती है। मैकियावेलीवाद सकारात्मक या नकारात्मक गुण हो सकता है; यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसका इस्तेमाल कैसे और किन परिस्थितियों में किया जाता है।