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बाइपोलर डिसऑर्डर

बाइपोलर डिसऑर्डर एक चिकित्सीय स्थिति है, जिसमें मूड, ऊर्जा और गतिविधि के स्तर में अत्यधिक बढ़ोतरी और गिरावट के चरण बारी-बारी से आते हैं। इन्हें मैनिक (या हाइपोमैनिक) और अवसादग्रस्तता के चरण कहा जाता है।

मैनिक चरणों के दौरान व्यक्ति अत्यधिक उत्साह, बहुत अधिक ऊर्जा और सोचने की गति में बढ़ोतरी महसूस कर सकता है तथा परिणामों पर विचार किए बिना जोखिम भरे काम कर सकता है। इसके विपरीत, अवसादग्रस्तता के चरणों में उदास मनोदशा, अधिकांश गतिविधियों में रुचि या आनंद की कमी और खुद को नुकसान पहुंचाने या आत्महत्या के विचार आ सकते हैं।

इस स्थिति के प्रबंधन के लिए कई पहलुओं वाली रणनीतियों की आवश्यकता होती है, जिनमें दवाओं से उपचार, मनोवैज्ञानिक सहायता और जीवनशैली में बदलाव शामिल हैं। बाइपोलर डिसऑर्डर का हर मामला अलग होता है, इसलिए विस्तृत निदान करना और व्यक्ति के अनुसार उपचार योजना बनाना महत्वपूर्ण है।