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इवान पेत्रोविच पावलोव

इवान पेत्रोविच पावलोव। 1849 से 1936 तक जीवित रहे इस रूसी वैज्ञानिक ने कंडीशंड रिफ्लेक्स के क्षेत्र में अपने अग्रणी शोध से मनोविज्ञान पर अमिट छाप छोड़ी। पाचन तंत्र पर किए गए काम के लिए उन्हें शरीर विज्ञान या चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार दिया गया था, लेकिन उनका मुख्य योगदान व्यवहारगत कंडीशनिंग की प्रक्रियाओं से संबंधित है।

पावलोव का प्रसिद्ध प्रयोग एक ऐसे कुत्ते पर किया गया था, जो भोजन से जुड़ी घंटी की आवाज सुनते ही लार छोड़ने लगता था। यह प्रयोग क्लासिकल कंडीशनिंग के सिद्धांत का आधार बना। इस खोज ने व्यवहारवाद की नींव रखी और मनोविज्ञान में सीखने तथा व्यवहार की समझ पर गहरा प्रभाव डाला।

पावलोव के शोध ने मनोविज्ञान के आधुनिक दृष्टिकोणों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इस बारे में उपयोगी जानकारी दी कि पर्यावरण से मिलने वाले उद्दीपन व्यवहार को कैसे प्रभावित कर सकते हैं।