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आत्म-साक्षात्कार

आत्म-साक्षात्कार (अंग्रेजी के "self-actualization" से) मानवतावादी मनोविज्ञान में अत्यधिक महत्त्व रखने वाली एक अवधारणा है। इसका अर्थ व्यक्ति की आंतरिक क्षमता को पूरी तरह उजागर करना और उसका अधिकतम विकास करना है।

आत्म-साक्षात्कार व्यक्तित्व के मानवतावादी सिद्धांतों में मुख्य भूमिका निभाता है, जैसे ए. मैस्लो और सी. रोजर्स के सिद्धांत। ए. मैस्लो के व्यक्तित्व सिद्धांत में आत्म-साक्षात्कार मानवीय आवश्यकताओं का सर्वोच्च स्तर है। उनका मानना था कि जीवन में बहुत कम लोग इस स्तर तक पहुंचते हैं, क्योंकि इसके लिए आवश्यकताओं के सभी निचले स्तरों का पूरा होना जरूरी है, जैसे शारीरिक आवश्यकताएं, सुरक्षा की आवश्यकता, सामाजिक आवश्यकताएं और सम्मान व मान्यता की आवश्यकता। जब ये सभी निचली आवश्यकताएं पूरी हो जाती हैं, तब व्यक्ति आत्म-साक्षात्कार की ओर बढ़ सकता है, जिसका अर्थ जीवन का उद्देश्य खोजना, आत्म-विकास करना और अपनी रचनात्मक व आध्यात्मिक क्षमता को उजागर करना है।