जैविक घड़ी वह प्रणाली है जो शरीर की क्रियाओं और व्यवहार में नियमित बदलावों को नियंत्रित करती है, जिनमें सोने-जागने का चक्र, हार्मोन का स्राव और मेटाबॉलिज्म शामिल हैं। जैविक घड़ी शरीर की आंतरिक प्रक्रियाओं को बाहरी प्राकृतिक लय के अनुरूप बनाती है।

मनोविज्ञान में यह अध्ययन किया जाता है कि जैविक घड़ी हमारी मानसिक स्थिति और व्यवहार को कैसे प्रभावित करती है। उदाहरण के लिए, सोने की अनियमित दिनचर्या या लंबे समय तक कृत्रिम रोशनी में रहने के कारण इस घड़ी में होने वाली गड़बड़ी नींद संबंधी विकारों, भावनात्मक अस्थिरता और मानसिक सक्रियता में कमी का कारण बन सकती है।