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जुड़वां अध्ययन विधि

जुड़वां अध्ययन विधि (अंग्रेजी: twin studies) जुड़वां बच्चों की मनोवैज्ञानिक और व्यवहार संबंधी विशेषताओं की तुलना पर आधारित है। इसमें खास तौर पर एक जैसे या मोनोजाइगोटिक जुड़वां, जिनकी आनुवंशिक जानकारी 100% समान होती है, और अलग-अलग अंडों से जन्मे या डाइजाइगोटिक जुड़वां, जिनकी आनुवंशिक जानकारी लगभग 50% समान होती है, की तुलना की जाती है, ताकि इन विशेषताओं पर आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारकों के प्रभाव की सीमा निर्धारित की जा सके।

जुड़वां जोड़ियों की तुलना करके शोधकर्ता यह आकलन कर सकते हैं कि उनकी मनोवैज्ञानिक विशेषताएं कितनी समान और कितनी अलग हैं। यदि मोनोजाइगोटिक जुड़वां किसी विशेषता में डाइजाइगोटिक जुड़वां की तुलना में अधिक समान हों, तो यह उस विशेषता के विकास में आनुवंशिक घटक की मौजूदगी का संकेत हो सकता है। यदि अलग-अलग परिवेशों में पले-बढ़े जुड़वां एक साथ पले-बढ़े जुड़वां की तुलना में आपस में अधिक समान हों, तो यह पर्यावरण के प्रभाव का संकेत हो सकता है।

जुड़वां अध्ययन वैज्ञानिकों को बुद्धिमत्ता, व्यक्तित्व के गुणों, रोगों की प्रवृत्ति और अन्य विभिन्न मनोवैज्ञानिक तथा व्यवहार संबंधी विशेषताओं पर आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारकों के सापेक्ष प्रभाव का आकलन करने में मदद करते हैं। यह विधि इस बात को अधिक गहराई से समझने में मदद करती है कि आनुवंशिकी और पर्यावरण किस तरह परस्पर क्रिया करते हैं तथा व्यक्ति के व्यक्तित्व और क्षमताओं के विकास को प्रभावित करते हैं।