पालन-पोषण (अंग्रेजी: Upbringing, education) व्यक्तित्व के विकास और समाजीकरण की एक जटिल और बहुस्तरीय प्रक्रिया है, जिसमें ज्ञान देना, नैतिक मूल्यों, सामाजिक नियमों और कौशलों का विकास करना शामिल है। पालन-पोषण में व्यक्ति के विकास के विभिन्न पहलू शामिल होते हैं: बौद्धिक, नैतिक, सामाजिक, शारीरिक और भावनात्मक।

पालन-पोषण की प्रक्रिया में न केवल शिक्षण संस्थानों की औपचारिक शिक्षा, बल्कि परिवार और समाज में मिलने वाली अनौपचारिक शिक्षा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसमें व्यक्ति के विशिष्ट गुणों को बढ़ावा देना, आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करना और संवाद एवं सामाजिक-भावनात्मक कौशल विकसित करना शामिल है।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य व्यक्ति को समाज में सक्रिय जीवन के लिए तैयार करना, आलोचनात्मक सोच विकसित करना, स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाना और नैतिक आचरण की योग्यता विकसित करना भी है। पालन-पोषण एक ऐसी पारस्परिक प्रक्रिया है जिसमें बच्चों और किशोरों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण होती है और वे अपने विचार, रुचियां तथा प्रतिभाएं इसमें शामिल करते हैं।